Friday, September 17, 2010
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
अपनी जली रूह की राख उड़ा कर
रुख हवाओ का दिखा रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
आज कुछ खुवाब बोए है कागज़ पर
कोशिश है नज्मो को बा - तरतीब करने की
किये जा रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
कुछ रह गया जो साथ न गया तुम्हारे
दिल की दराजों को फिर से खंगाल कर
आज वोह सामान निकाल रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
कुछ लम्हे टंगे है मेरे कमरे की दीवार पर
वक़्त की धूल सी जम गई है उन पर
उन्हे उतार रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
थोड़ी सी खताए रखी है अलमारी के ऊपर
सजाए पता नहीं कब तक आयेगी
एक ज़माने से इंतजार कर रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
Monday, September 6, 2010
खुलने लगी दुकाने!!!!
लिखने पढने के
अब सारे पैमाने
बारहखड़ी रटे बिन बच्चे
होते आज सयाने !!!
नयी सदी है
नए विषय है
नयी नयी सब बातें
गए वक़्त की
चीजे लगती
खड़िया,कलम,दवाते
सब्द वोही है
पर सब्दो के
बदल गए सब माने!!!
अपने ताई
सीखते है अब
सबक सभी दुनियावी
बच्चो को
मंजूर नहीं वे
कीड़ा बने किताबे ;
स्कूल पर भारी दीखते
कोर्ट काचेहरी थाने!
ताल किनारे
बना मदरसा
उसी ताल में डूबा
रोज कागजी नाक्सो से
टीचेर बेचारा उबा
बांस बेहया के झुरमुट
अब दिन में लगे डराने !
आने वाले कल की
दिखती
धुंधली बहुत ईमारत
बिना नीव के
खड़ी हो रही
इतनी बड़ी ईमारत
जब से गली गली
खुलने लगी दुकाने!!!!
मेरा बचपन

हाथ आकर लगा गया कोई
मेरा छप्पर उठा गया कोई....
लग गया एक मशीन में मैं भी
शहर में लेकर आगया कोई
मैं खड़ा था की पीठ पर मेरी
इतिहार इक लगा गया कोई
ये सदी धुप को तरसती है
जैसे सूरज को खा गया कोई
ऐसी महंगाई है की चेहरा भी
बेच कर अपना खा गया कोई
अब वो अरमान है ना वो सपने
सब कबूतर उड़ा गया कोई
मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाव से जब भी आ गया कोई.........
Sunday, September 5, 2010
जामुन का पेड़
जामुन का जो पौधा
लगाया था पिता ने
अब वो मुकामल पेड़ बन गया है
घना,छायादार,फलदार
बिलकुल पिता की तरह
जेठ का फनफनाता सूरज
जब फटकारता है कोड़े
जामुन का पेड़ की नंगी पीठ पर
तब खमोशी से सहता है ये कठोर यातना
ताकि उपलब्ध हो सके हमें
चाव का एक अदद टुकड़ा पिता भी जामुन की पेड़ की तरह है
जब भी घिरे हम
उलझन के चक्र में
या डूबने वाले थे दुखो के बाढ़ में
पिता ढाल बन कर खड़े हो गए
हमारे और संकट के बीच
जामुन का ये छोटा सा पेड़
हमारी छोटी बड़ी कामयाबी पर
ख़ुशी से झूमता है ऐसे
की थर्थारने लगती है खिड़कियाँ घरो की
लेकिन ऐसे अवसर पर
दिखाई देती है पिता के चेहरे पर
गर्व की पतली सी लकीर बस........
हमारी खातिर
अपना सब कुछ नौचावार करने को
आतुर रहता है ये जामुन का पेड़......
जैसे पिता हो हमारा.....
पहेली बनी हुयी है
हमारे लिए ये बात
की पिता जामुन के पेड़ की तरह है
या जामुन का पेड़ पिता की तरह!!!!
शिक्षक
जो मानव मन में ज्ञान का दीपक जलाता है,
अज्ञान का तम मन मंदिर से दूर भगाता है!
मानव रचना का शिल्पी कहलाता है,यही मनुज रूपी देवता शिक्षक कहलाता है!
रण के बीच में जब अर्जुन दुर्बल पड़े
,यह सोच बैठे सामने मेरी स्वजन खड़े!
तब श्री कृष्ण ने गुर का आसन लिया,
बीच रण के ही अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया!
ज्यूँ ही श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान था बांटा,
उखाड़ फैंका अर्जुन के मन में फंसा हुआ मोह का काँटा!
जो भूले हुए को उसका कर्त्तव्य याद दिलाता है,
यही मनुज रूपी देवता शिक्षक कहलाता है!
जब मेंढ़ टूटी खेत की गुरु ने आरुणि को,
कैसे भी हो शिष्य रोकना है इस खेत से छूटते पानी को!
न होगा जो पानी तो फ़सल बर्बाद होगी,
इस विद्यालय के शिष्यों की कैसे फिर क्षुधा शांत होगी?
आरुणि चल दिए और आये न कई घंटों बाद भी,
चिंता हुई गुरु को आया चेहरे पर विषाद भी!
जाकर देखा तो पानी है रुका हुआ,
शिष्य उनका है टूटी मेंध की जगह लेटा हुआ!
और जाकर उन्होंने उसको उठा लिया,
अपने इस शिष्य को सीने लगा लिया!
वो जो गिरते हो को भी सीने लगाता है,
यही मनुज रूपी देवता शिक्षक कहलाता है!
और क्या कहूं में शिक्षक की महत्ता के बारे में,
वो ही होता है किरण अज्ञान के अंधियारे में!
आपको निस्वार्थ भाव से ज्ञान वो देता है,
उत्थान हो आपका यही ख्वाइश वो रखता है!
देख आपकी प्रगति को जो मन ही मन हर्षाता है,
यही मनुज रूपी देवता शिक्षक कहलाता है!
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाये!!!!!
Thursday, September 2, 2010
आप मुझे अच्छी लगती हो ............
आप मुझे अच्छी लगती हो
कुछ चंचल सी,कुछ चुप सी
थोड़ी पागल लगती हो
आप मुझे अच्छी लगती हो
...
है चाहने वाले बहुत
पर आप मै बात है कुछ अलग
आप अपनी सी लगती हो
वो कहते कहते रुक जाना
बैठे बैठे कही खो जाना
कुछ उलझन मे रहती हो ............
आप मुझे अच्छी लगती हो ............
आप मुझे अच्छी लगती हो ............
आप मुझे अच्छी लगती हो
कुछ चंचल सी,कुछ चुप सी
थोड़ी पागल लगती हो
आप मुझे अच्छी लगती हो
...
है चाहने वाले बहुत
पर आप मै बात है कुछ अलग
आप अपनी सी लगती हो
वो कहते कहते रुक जाना
बैठे बैठे कही खो जाना
कुछ उलझन मे रहती हो ............
आप मुझे अच्छी लगती हो ............