अच्छा हुआ की सर पर कोई छत नहीं रही!!
कैसी मशाले लेकर चले तीरगी में आप !
जो रौशनी थी वो भी सलामत नहीं रही !!
हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया !
हम पर किसी खुदा की इनायत नहीं रही!!
मेरे चमन में कोई नशेमन नहीं रहा !
या यूँ कहो की बर्क(बिजली) की दहशत नहीं रही !!
हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते है लोग !
रो रो कर बात कहने की आदत नहीं रही !!
सीने में जिन्दगी के अलामत(चिन्ह्ह) है अभी !
गो जिन्दगी की कोई जरुरत नहीं रही !!


