Tuesday, March 27, 2012

तुम कैसे भुला पाओगी

वो पहली हँसी ,वो पहला प्यार


पहला वो स्पर्श


तुम कैसे भूल पाओगी


पार्क में पहला इन्तजार


बेफिक्रो सा गलियों में घूमना  


तुम कैसे भुला पाओगी


क्या था मिठास,आंसुओं  


का दर्द


मेरे साथ बिताये वो पल


तुम कैसे भुला पाओगी


भूल जाना ना आसान होगा


याद बहुत आऊंगा


आंसू हू मैं वो.....


जो हर दर्द में चला आऊंगा!


3 comments:

  1. amit chhap ...
    sunder rachna ...
    shubhkamnayen

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  2. प्यार की प्यारी सी कविता ...बीते वक्त के कुछ यादगार लम्हें

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