
ये वीरान गलियां, ये टूटे आशियाँ
ये हैवान भवरें,ये फूल बनती कलियाँ
देख ले अपनी जमीं पर कैसा ये शमां है
शैतान बन गए इंसा ऐ भगवान तू कहाँ है
ये मासूस चेहरे,ये आसुओं का सागर
रात बनी है ज़िंदगी,ना जाने कब होगी सहर
आते है बेटे और,उनके बाप भी
यहाँ ये सहमी हुयी नादान लुट गयी जिनकी दुनिया
ये नकली मुखौटे, ये सुर्ख सजावटे
ये रोते हुए दिल मे खुशी की मिलावटे
जरा झुक के देख ले,तेरा करिश्मा यहाँ जमा है
शैतान बन गए इंसा ऐ भगवान तू कहाँ है
ये हिन्दोस्तां के सपने,ये भारत की बेटियाँ
ये आदर्श हमारे,मनाते ये रंगरेलियाँ
नेता ये कल के,ये देश के पालनहार
देश को सजा रहे जो लूट कर देश का श्रृंगार
ये नोटों के अम्बार, ये कदमो की रफ़्तार
लाल रोशनी मे डूबा, ये नकली संसार
नाज़ है जिन पर हमे,आज सारे वो यहाँ है
शैतान बन गए इंसा ऐ भगवान तू कहाँ है
अपने उस भगवान को टू जमीं पर बुलाओ
ये संसार उसका जरा उसी को दिखाओ
कोई रूप धर कर अब क्यों नही आता यहाँ है
शैतान बन गए इंसा ऐ भगवान तू कहाँ है
bahut marmik varnan aaj kee sthiti ka........na bhagvan hai na hee unka dar.........
ReplyDeleteab to inhe khush karne ke zevar mukut aur ratn jadit aabhushan dene ke raste bhee bhakto ko malum hai.......
sashakt lekhan.
इस लाजवाब और लजीज पसंद को सलाम। बहुत सुन्दर टिप्पणी है आपकी ।
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