Thursday, November 17, 2011

अपहरण आज एक उद्योग है!

मुझको उसका इस तरह होना विकल लगा !
और उसको मेरा हो जाना अटल अदभूत लगा !!

राजमहलो के इरादे थे बड़े लेकिन मुझे !
झुगियों का उन इरादों में दखल अदभूत लगा!!

अपहरण था जुर्म कल तक आज एक उद्योग है!
इस नयी तकनीक का भी बाहुबल अदभूत लगा !!

जो परायों ने किया अनुमान था उसका मुझे !
घर जो अपनों ने किया मुझसे वो छल अदभूत लगा!!

स्वार्थो की छल में शकुनी से डरता था मैं !
इसलिए सबको मेरा होना विफल अदभूत लगा!!

बुद्धिजीवी ला सकेंगे क्या कोई बदलाव भी !
प्रशन जैसा ही मिला उत्तर सरल अदभूत लगा !!

इक - जरा- सी नींद की गोली सुविधा के लिए !
भूलने की खुद को ही करना पहल अदभूत लगा !!

3 comments:

  1. आपका अन्दाज-ए-बयाँ अद्भुत लगा।

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  2. वाह ..बहुत खूब

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