Sunday, June 24, 2012

कोई तो लौटा दे मुझे मेरा बचपन !!!!!

बचपन में बड़ो के मुह से सुना था मैंने 


की बचपन बहुत  अच्छा होता है !

सोचता था तब मैं की 

सबसे डांट खा कर ,

भारी बस्तो का बोझ उठा कर 

सबका कहना मान कर 

बचपन अच्छा कैसे हो सकता है?

बड़े तो बड़े है ,अपनी मनमर्जी करते है 

न पढते है,न लिखते है,घूमते फिरते है 

न डांट सुनना पड़ता है,न कहना मानना पड़ता है 

सब कुछ कितना अच्छा 

इससे उधेरबुन में में मैं बड़ा हो गया है 

अब अपनी मनमर्जी है 

तो चाहता हू ,मैं अब की सब डांटे मुझे   

भारी बस्ते लाद दे मुझपर 

आवाज  दे कर काम बताये मुझे 

सबका कहना मानूंगा 

कोई तो लौटा दे मुझे मेरा बचपन !!!!!



2 comments:

  1. बचपन छीने, निठुर व्यवस्था..

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  2. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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