Wednesday, April 14, 2010

गर उनका बस चले तो

गर उनका बस चले तो
बेच देंगे आसमान
सोख लेंगे सागर
चुरा लेंगे पहाड़
पी जायेंगे नदियाँ
सिर्फ इस लिए
क्यूँ की उन्हें जड़ाने होंगे
अंगूठी में नग
घर में संगमरमर
चड़ने के को मैतिज सांत्रो और इंडिका कार
और दामादो को देना होगा
बेटियों की उचाई तक
नबे करोड़ का नगीना.....

2 comments:

  1. हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

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