Wednesday, April 7, 2010

तन्हा

सब से छुपा कर दर्द को वो मुस्कुरा दिया
उसकी हसी ने तो आज मुझे भी रुला दिया
लहजे से उठ रहा था दर्द का धुआ
चेहरा बता रहा था की कुछ गवा दिया
आवाज में ठहराव था आँखों में नमी थी
और कह रहा था की मैंने सब कुछ गवा दिया
जाने क्या उस को लोगो से थी शिकायत
तन्हाई के देस में खुद को बसा लिया
खुद भी वो हम से बीचर कर अधुरा सा हो गया
मुझको भी इतने लोगो में तन्हा बना दिया.......

2 comments:

  1. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  2. बहुत सुन्दर रचना । आभार
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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